“बातें मैं भी आम ही करती हूँ, बस समझने वाले इसे खास बना देते है I”

कभी लहराता हुआ मदमाता सावन,  कभी उजली चाँदनी का श्रृंगार, कभी पपीहे का मधुर गुंजन ,तो कभी दर्द भरी चित्कार, हाँ यही तो है जीवन, यही है हर दिन नया, हर रात नई,  बह जाओ इस धारा में इसके हर पल की सौगात नई।।।

सिसकती चीखो को अब और नज़रअंदाज़ न कर, अंधेरो में डूबी रूहो को राह दिखा, तकलीफों को अंत करने का फरमान जारी कर ॥

“मैं चल पड़ी नई रहा पर ,उम्मीद का दामन थामे!  किरणों की पालकी में बैठ कर , चली अपनी दुनिया सजाने, किताबे बहुत पढ़ी हमने, खूब अटकले लगाई, पर खुद पर जब किया भरोसा , जब कुंजी हाथ में आयी, लक्ष्मीबाई से साहस माँगा, चाणक्य से नीति पाई, दृढ़ता की बातें में लिए, निश्चय की ज्योति जलाई !!”

“जो सब्र के साथ इंतजार करना जानते हैं
उनके पास हर चीज किसी न किसी तरीके से पहुँच जाती है “

“सोचने से कहाँ मिलते हैं तमन्नाओ के शहर, चलना भी जरूरी हैं मंजिल को पाने के लिए॥”

“हर चीज़ से बढ़कर , अपने जीवन की नायिका बनिए शिकार नहीं॥ “

“तेरा ही अक्स मुझमे झलकता हैं, और तारीफें में बटोर लेती हूँ, कभी कभी सोचती हूँ, अपना नूर तेरे नूर में मिलाकर, अपनी हस्ती ही मिटा दूँ ||”